नील-रूपमती

neel-roopmati greek erotic story from Olympus Zeus and Europa

ग्रीक मिथिहासक कामुक कहानी का अनुवाद कररहां हूँ। इस में zeus को नील Europa को रूपमती का नाम दिया है। ग्रीक मिथिहास कामुक कहानियों के साथ भरा पड़ा है उस में से एक कहानी का अनुवाद)राजकुमारी रूपमती समुद्र के किनारे अपनी, सहेलियों के साथ खेल रही थी। अपनी ख़ूबसूरती से अनजान और इस बात से अनजान कि कोई उसके उपर पल पल के लिए घात लगाई बैठा है। उसके पिताकी तरफ से उसको इस तरह पाला गया था कि वह अभी तक किसी पराए पुरुष की छू से भी अनजान थी । परंतु आकाश के राजे नील की निगाह उसते बदस्तूर थी । वह सिर्फ़ एक मौका चाहता था। उस बेहिसाब हुसन को भोगने के लिए वह उतावला था। उसकी अपनी बनावट ऐसी था कि रूपमती जैसी कोमल स्त्री उस की तरफ देखकर एकदम डर सकती थी। नील आज के इस मौके को वह ऐसे ही जाने नहीं देना चाहता था. नील ने ख़ुद को एक सफ़ेद रंग के बहुत ही प्यारे दिखाई देते बैल के रूप में बदल लिया। ख़रगोश से भी अधिक सफ़ेद मगर घोड़े से भी ताकतवर और पथर से भी गठीला शरीर परन्तु आँखों में हिरण जैसी मासूमियत। वह समुद्र के पानी में से निकल कर छोटे छोटे कदमों के साथ खेल रही और कुछ फूल पत्तियाँ चुन रही राजकुमारी की तरफ बढ़ा।
नील रूपमती की आँखों में सीधा झांक रहा थी। दोनों की आँखें में मासूमियत भरेएक ही जैसे हाव भाव थे। रूपमती उसके रंग रूप और बनावट तथा आँखें में खो गई थी। बैल बना नील पल पल उस की तरफ बढ़ रहा था । रूपमती ने खुद को एक कदम भी पीछे नहीं किया था । नील ने पैरों के पास आ कर उसके पैरों को स्पर्ष किया। ठंडी रेत के साथ उसके पैर ठंडे था उस पर हल्की गर्म बैल की जीभ के स्पर्ष ने उसके मन को बेकाबू कर दिया था। हाथों के फूलों को उसने बैल के गर्दन के साथ उड़ेल दिया । उसके सींगों को अपने हाथों के साथ छू कर देखा। उसको ये बेहद मुलायम पर सख़्त वस्तु बहुत पसंद आई। अपने हाथ उसकी गर्दन और फिराती हुई उसने शरीर पर फिराने लगी। मुलायम रेशम जैसे बालों की छू ने रूपमती के मन में से डर को पूरी तरह से निकाल दिया था। उसको हाथ फिरातीहु ए उस को अचानक बैल पर सवारी करने का मन किया। उसके मन की बात समझते नील झुक गया।
रूपमती उसके ऊपर सवार हो गई। नील धीरे धीरे पैर बढ़ाता समुद्र की तरफ बढ़ने लगा। पलों में उसकी रफ्तार बढ़ने लगी थी। परन्तु रूपमती को बिल्कुल घबराहट नहीं हुई थी जो भी हो रहा था वह इन पलों का आनंद ले रही थी। उसको महसूस हो रहा था जैसे उसकी जांघों के बीच नील की मुलायम चमड़ी सख़्त हो रही हो।
परन्तु यह सख्ती उसके मन में डर पैदा करन की अपेक्षा उसको ख़ुद को ज़ोर के साथ नील के जिस्म के साथ रगड़ने के लिए फुसला रही थी । उसकी आँखें मूंदने लगी थी । इसी का फ़ायदा उठाते हुए नील ने पलों में समुद्र को पार कर एक टापू पर पहुँच गया। अब उस टापू और नील और राजकुमारी से बिना कोई नहीं था। रूपमती की सहेलियां पीछे छूट गई थी।
इस अचानक रोक से रूपमती चौंकी । परन्तु अपने आस पास की ख़ूबसूरती देख कर वो दंग रह गई। वह नील की पीठ से उत्तरी और अपने पैर से टापू की रेत के साथ खेलने लगी। कुछ पल पहले का आनंदअ भी भी उसके मन पर भारी था। उसने बैल की आँखें की तरफ देखते हुए पूछा कि वह कहाँ है? और वो कौन है और उससे क्या चाहता है।
नील अपना रूप बदल चूका था । परन्तु अपने शरीर को रूपमती के आकार जितना ही रखा । उस की तरफ मुखातिब होते हुए उसने अपनी पहचान बतायी। और बताया कि वह आसमान से ही उसकी सुंदरता को निहारता पता नहीं कब से इस पल को इन्तज़ार कर रहा था । और किसी और ग्रीक देवता से पहले उसे भोगना चाहता था। और वो उसे उसकी सुंदरता के अंदर भरे उस तूफ़ान का एहसास करवाना चाहता है जिससे वो अभी तक अपरिचित है । रूपमती की कुँआरी सुंदरता पहले ही उसके स्पर्ष के साथ खिल चुकी थी। उसके शब्दों का अर्थ वह नहीं जानती थी। परन्तु वह फिर उस की पीठ की छू देखना चाहती थी जो चाहे अब मनुष्य हो चुका था परन्तु उसके शरीर का गठीलापण वैसे बैल जैसा ही था। वह किसी जादू की तरह उसकी बाज़ूएँ में बंध गई। आसमान में अचानक बादल गरजने लगे जो नील के मन में उठे तूफ़ान का ही एक रूप था। उसको छूते ही रूपमती के जिस्म में आए बदलाव नील को महसूस हुए। उसने अपनी एक उंगली उसकी गुलाबी गाल पर घुमाई। जिसका करंट रूपमती के पूरे जिस्म में दौड़ गया और बिल्कुल उसकी टांगों के बीच जा कर इकट्ठा हो गया । इस झटके को सहने के लिए उसको टांगें को और ज्यादा फैलाना पड़ा। उसी समुद्र की रेत पर नील और रूपमती लेट गए।
नील ने उसको अपनी, बाज़ूएँ में कस लिया था। रेत और ठंडी बहती हवा उनके जिस्मों को छू कर गर्म हो रही थी। पहली बार नील ने उसके होंठों को अपने होंठों के साथ छुआ । लंबे चुंबन से पहले कई बार होंठ छू कर अलग करके उसके अनछोहे होंठ में प्यास दौड़ा दी। उसके लंबे चुंबन के साथ जैसे रूपमती मदहोश हो गई हो। आज तक उसके कुंवारे अंगों को किसी मर्द ने सूंघा तक नहीं था और होंठो के मिलन भर से ही इतनी तड़प मुमकिन थी।
वह खुद के जिस्म पर नील की इच्छा को महसूस कर सकती थी जो बढ़ती हुई बिल्कुल बैल के सींगों जैसी सख़्त हो गई थी। परन्तु वह अनजान थी कि वह इस के साथ क्या कर सकती है। नील के मन पर काम पूरी तरह भारी था और उसके दबाव में रूपमती उसके नीचे लेटी उसी अंधेरे में उड़ रही थी। जिसने उसके जिस्म के हर हिस्से में तड़प छेड़ दी थी। और जब नील ने उसको आँखें बंद करने के लिए कहा और उसका पहना नील रंग का वस्त्र उतार दिया। उसकी पूरा जिस्म नील की आँखें के सामने नगन था।
नील के हाथों ने उसके होंठों से लेकर गर्दन से होते हुए उसके उरोजों के बीच तक अपनी, उंगलियें को इस तरीके से घुमाया कि उसकी जांघों ने खुद ही अपने आप को भींच लिया । रूपमती को नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला बस वह यह चाहती थी कि जो भी हो बस जल्दी से हो जाए। वह इस दौड़ती बिजली को और नहीं सह सकती थी । उसकी आँखें में लाली उत्तर आई थी जैसे अभी भांग पी हुए। और होंठो पर कंपन थी और जिस्म के हर कोने में अकड़ और पानी ही पानी रिस रहा था।
नील उसकी बेचैनी को समझता था । भला एक कुंवारी और ख़ूबसूरत सुंदर युवती कब तक उसकी प्रेम भरे स्पर्ष को बरदाश्त कर सकती थी? उसने अपने पूरे शरीर को उसके ऊपर जकड़ लिया इस तरह लग रहा था जैसे उसका आकार बढ़ गया हो। रूपमती उसकी बाज़ूएँ में जकड़ी गई। उसकी पीठ पर जकड़े हाथों ने पीठ पर जमी रेत को हटाते हुए पीठ को सहलाया । और हाथ गर्दन के पिछली तरफ़ से कमर तक दौडा दिए । वह उसकी बाज़ूएँ में झूल गई थी। उसकी टांगें अपने आप ही खुल गई जैसे वह नील को अपने अंदर भींच लेने के लिए तैयार हो।
बिजली की एक कड़क के साथ नील को उसने अपने अंदर महसूस किया। इस कड़क की पराकाष्ठा रूपमती को दिल तक महसूस हुई। नील ने ख़ुद को हर तरीके उसके शरीर के बराबर आकार में ढाल लिया था । बादलों की गड़गड़ाहट तेज हो रही थी और उसके साथ हवा भी तेजी से बह रही थी। सिर्फ़ बाहर का मौसम ही नहीं बल्कि अपने शरीर के ऊपर और अपने शरीर के अंदर भी रूपमती इसी तूफ़ान को महसूस कर रही थी। हर गुज़रते पल के साथ वह नये शिखर को चूम रही थी। जब तक एक बदल अचानक नहीं फटा और फिर कोई बांध टूट गया हो। उस पल नील और रूपमती एक दूसरे की बाज़ूएँ में झूल गए। नील ने रूपमती के काँपते शरीर को अपने हाथों में लिया और उंगलियों के साथ उसको सहलाने लगा। जब तक वह शांत न हो गई। सहलाता रहा।
“क्या मैं कभी तुझे दोबारा मिल पाउंगी ? उसने नील की तरफ देखते हुए पूछा।
“जब कभी भी मुझे याद कर कर उस आसमान की तरफदेखोगी तुझे महसूस होगा कि मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ। ” उसकी आँखें में झांकते हुए नील ने कहा और हवा में लुप्त हो गया।
“अलविदा ” रूपमती के मुँह बरबस से निकला।

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